किसानों ने ढूढ लिया पराली से निपटने का ईको-फ्रेंडली तरीका, अब नहीं...

किसानों ने ढूढ लिया पराली से निपटने का ईको-फ्रेंडली तरीका, अब नहीं होगा प्रदूषण

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प्रतीकात्मक फोटो

पिछले साल पंजाब और हरियाणा के गांवों में पराली जलाए जाने के कारण राजधानी दिल्ली में काफी प्रदूषण हो गया था जिसके कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड रहा था. इसी के चलते इस बार पहले से ही प्रशासन अलर्ट है.

वहीं पंजाब के नाभा के पास एक गांव में पराली जलाने को लेकर प्रतिबद्ध लगा है ताकि हवा में प्रदुषण ना फैले. इस गांव को नाम कलार माजरा है यहां 60 परिवार 700 एकड़ जमीन पर खेती करते है और एक भी पराली नहीं जलाई गई है.

किसान बीर दलविंदर सिंह जो की इसी गांव के रहने वाले हैं उन्होंने पराली न जलाने की सरकार की अपील को अपने पड़ोसियों और गांववालों तक पहुंचाया. दलविंदर  का कहना है कि, ‘सरकार ने हमारे गांव को एक मॉडल के तौर पर चुना है और फसल से बचने वाले कचरे और पराली के निस्तारण के लिए हर तरह की मशीनरी मुहैया कराई है.’

नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी गांव के इस गांव के पर्यावरण सहयोगी कदम की तारीफ की है.

इस को साल सरकार की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला है, फिर भी यहां के करीब 70 प्रतिशत किसानों ने पराली न जलाने का फैसला किया है. गांव के लोगों ने इस बार अपनी सूझ-बूझ इससे निपटने का एक सरल और कारगर तरीका अपनाया है. किसानों ने इस बार खेत जोतकर पराली को मिट्टी में दबाने का फैसला लिया है इससे न सिर्फ दिल्ली की हवा साफ रहेगी बल्कि खेतों की उर्वरता भी बढ़ेगी.