एनसीईआरटी में चरम पर भ्रष्टाचार, 4 अयोग्य कंपनियो को मिला ई-टेंडर

एनसीईआरटी में चरम पर भ्रष्टाचार, 4 अयोग्य कंपनियो को मिला ई-टेंडर

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नई दिल्ली: एनसीईआरटी की किट्स को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है बताया यह जा रहा है कि नियमों को ताक पर रखकर एनसीआरटी की किट्स की ई-टेंडरिंग हो रही है. इसके पीछे एनसीईआरटी के डायरेक्टर और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से गुजरात की कुछ निजी कंपनियों को टेंडर दिए गए है.

एनसीईआरटी किट्स का टेंडर जिन कंपनियों के पास दिया गया है वह कंपनियां ई-टेंडर के लिए योग्य ही नहीं है. निजी फायदे के लिए टेंडर दी गई 4 कंपनियो को एनसीआरटी के काम का कोई तजुर्बा तक नहीं है. इन सभी कंपनियों में फर्नीचर का काम होता है.

बता दें कि एनसीईआरटी किड्स की ई टेंडरिंग 2016 में हुई थी जिसमें पहले से एलिजिबल कंपनियां काम कर रही थी लेकिन 2016 में अचानक गुजरात की कुछ कंपनियों को निजी फायदा पहुंचाने के चक्कर में एनसीआरटी के डायरेक्टर और एनसीईआरटी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से ई-टेंडर गलत तरीके से और नियमों को ताक पर रखकर गुजरात की चार कंपनियों को दे दिया गया. खास बात ये है कि जिन कंपनियों को एनसीईआरटी का टेंडर्ड दिया गया कंपनियां एनसीईआरटी के टेंडर्स को लेने के लिए योग्य ही नहीं है बावजूद उसके अधिकारियों की मिलीभगत से ई-टेंडर गुजरात की 4 कंपनियों को दे दिया गया जिन कंपनियो को टेंडर दिए गए है उनके नाम कुछ इस प्रकार हैं

1.TITLE DISPLAY SYSTEM PVT LTD

2.NIRMAN MULTIART PVT LTD

3.MIT ENTERPRISES

4.SUJAKO INTERIORS PVT LTD

ये सभी कंपनियां गुजरात के अहमदाबाद की है. इस पूरे मामले में एलिजिबल कंपनियों द्वारा एचआरडी मिनिस्ट्री पीएम मो सीबीआई सहित कई जगह शिकायत की गई लेकिन इस पर कोई भी कार्यवाही हुई. हालांकि खाना पूर्ति के लिए इस पूरे मामले पर विजिलेंस की जांच  चल रही.

अगस्त 2018 को फिर से टेंडर की डेट आई लेकिन इस बार भी एनसीईआरटी में भ्रष्टाचार चरम पर दिखा गुजरात की उन्हीं चार कंपनियों को पहले से दिए गए टेंडर को एक्सटेंड कर दिया गया जबकि नियम के मुताबिक टेंडर को एक्सटेंड नहीं किया जा सकता निजी फायदे के लिए यह टेंडर एक बार फिर उन कंपनियों के हाथ में दिया गया जिन कंपनियों ने कभी एनसीईआरटी का काम किया ही नहीं था. मामले में कई लोगों के द्वारा शिकायतें की गई लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई.

एनसीईआरटी में चल रहे इस भ्रष्टाचार के लिए एक आरटीआई भी लगाई गई और यह पूछा गया कि आपके पास इस तरह के कितनी शिकायतें आई हैं तो पहले कई आरटीआई का जवाब ही नहीं आया और जिस आरटीआई का जवाब आया उसमें यह लिखा हुआ आया है कि हमें खुद नहीं पता कि हमारे पास कितनी शिकायतें आई है.